पिताजी की कविता

पिताजी की कविता

दोस्तों, मेरे पिताजी डाक्टर एस बी मिश्रा एक रिटायर्ड भूगर्भ शास्त्री (geologist) हैं। उनकी किताब “Story of an Ordinary Indian” अगले वर्ष Roli Books द्वारा प्रकाशित होगी। उन्होंने एक कविता लिखी, यहाँ प्रस्तुत है … शेख चिल्ली की तरह मैं सोचता हूँ बैठकर बंद आँखों से कभी मैं देखता सपने मुंगेरीलाल के गरीबों के खजाने(…)

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Life is beautiful: A Kasauli diary

Life is beautiful: A Kasauli diary

I saw Mars last night. With the naked eye. I saw a barber who works his craft with the pride of a painter or a classical singer. I saw old grandmothers laugh like schoolgirls with two plaits. I waved to the one-year-old child I meet every day on my evening walk and he got up(…)

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जुगनुओं के शहर से एक और ख़त

जुगनुओं के शहर से एक और ख़त

इक अजनबी है अजनबी शहर को आ गया होटल जो लौटा तो लगा कि घर को आ गयातन्हाई से मिलना हुआ कितने बरस के बाद कमबख्त को करते रहे कितना तरस के याद कितने ये चेहरे ओढ़ के दिल्ली में खो गयी ख़त लिक्खे, पुकारा किये, खामोश हो गयी इक छोटे से शहर में है(…)

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जुगनू भरे रास्ते से एक ख़त

जुगनू भरे रास्ते से एक ख़त

पाँच दिन। पाँच दुनिया। कितना भाग रहा हूँ मैं। पहले दिन द्रास में था, कारगिल से दो घंटे की दूरी पर। १९९९ का युद्धक्षेत्र। दूसरे दिन श्रीनगर में। डल झील के किनारे एक खूबसूरत होटल में असली दुनिया से बहुत दूर। तीसरे दिन दिल्ली वापस, उधार की ज़िन्दगी जीने के लिए। दफ्तर गया। फर्जी मुस्कुराया। छेड़। चुगल। डेडलाइन।(…)

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कारगिल (Kargil)

कारगिल (Kargil)

दोस्तों आज ही कारगिल से लौटा, एक हफ्ते से वहां था … युद्घ के समय वहां दो महीने बिताये थे, उसके बाद अब वापस गया। अजब गुज़रे सात दिन … मोबाइल फ़ोन, टी वी और असलीदुनिया के ग़मों से बहुत दूर … ये हैं कुछ तस्वीरें … जो दो महिलाएं घाघरा चोली में हैं उनके पति सैनिक थे(…)

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My silence, music and Faiz

Forgive my long silence … Life was trying to catch up with me. I am still walking ahead. Let me break my long silence with the notes of music — three of my new songs from two soon-to-be-released films … This is “Tere Bin Kahan Hamse” … from the about-to-be released “Jashnn” from the Bhatts.(…)

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I met my own slumdog

I met my own slumdog

This weekend in Gujarat, I met a slum-dog. Who told me of a millionaire. He was a tea shop waiter at a restaurant on a Gujarat highway. But how did he get to learn to talk in English? How does he know about European countries? How does he know that the Saluki dog originated in the(…)

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Inside the Idiot Box of memory

Inside the Idiot Box of memory

Let me take you to several minutes before 6 p.m. on crisp winter evenings in the 1980s. In a cobweb of narrow Lucknow lanes, my four young uncles would be about to return home on their Bajaj scooters, my tough cookie grandfather would be about to have his evening tea and on the first floor,(…)

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From Shekhar Kapur’s blog

From Shekhar Kapur’s blog

Shekhar Kapur, one of India’s best known filmmakers worldwide, asked me to write something for his very popular blog and I most happily did. I am reproducing it here. It got some very interesting comments as well from his readers. Shekhar, thanks for having me on your blog. Here goes: “Quick! Help me! I have forgotten to(…)

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नए साल का गीत

नए साल का गीत

इस गीत की कुछ पंक्तियाँ मैंने काफ़ी पहले लिखी थीं … मुंबई के आतंकवादी हमले के बाद इसे पूरा किया. आपके साथ फिर से बाँट रहा हूँ. इसे एन डी टी वी पर संगीतबद्ध कर के दिखाया जा रहा है.     रेत में सर किए यूँ ही बैठा रहा सोचा मुश्किल मेरी ऐसे टल(…)

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