आज मंडे को इक ख़याल आया

आज मंडे को इक ख़याल आया थका बुझा सा खस्ताहाल आया कहे “शायर जी, दे दो शक्ल मुझे” मैंने बोला, खुदा दे अक्ल तुझे बंदा गुस्से में मुझसे कहता है अगरचे मैं नहीं तो तू क्या है? तू है शायर बना तो ज़ाहिर है कहीं पे अक्ल तू भी डाल आया आज मंडे को इक(…)

1

जो आ जाता दबे पाओं

जो आ जाता दबे पाओं कभी तू रौशनी के घर अँधेरे का लगा टीका बलाएँ तेरी ले लेते   जो आ जाता तू ले नश्तर बिना सोचे हम अपने सर करी हैं जो, करेगा जो खताएँ तेरी ले लेते   जो वापस लौट आता तू यूँ करते फिर न जाता तू कि रस्ते तेरे ले(…)

2

इक रोज़ बयाबान में …

इक रोज़ बयाबान में देखा तो था हैरान मैं आकाश पे जड़ा था बादल से जो कूदा था तेरे ग़म का वो लम्हा था तन्हाई का मुखड़ा था इक मोती सा टुकड़ा था कोई भेस नया धर के कहीं दूर से उतरा था कुछ और कहाँ था वो तेरी आँख का कतरा था … कुछ(…)

4

बग़ावत होगी इक दिन, तब मिलेंगे

किसी ने कर दिया छलनी है मुझको कहीं पे जा के वो बैठा हुआ है न रो इतना, कि तेरे आंसुओं पे मेरा कातिल कहीं पे हँस रहा है बचा के रख तू ये तकलीफ अपनी धधकने दे इसे, शोले खिलेंगे बस इतना कह दे जा के रहनुमा से बग़ावत होगी इक दिन, तब मिलेंगे

1

रात के खामोश घर के सामने

रात के खामोश घर के सामने हाथ भर जुगनू धरे हैं शाम ने फिर से तेरे रास्ते चलता हूँ मैं फिर पुकारा मुझ को तेरे नाम ने रात के खामोश घर के सामने …

2

एक कहानी और मैं ज़िद पे अड़े

एक कहानी और मैं  ज़िद पे अड़े  दोनों में से कोई ना  आगे बढ़े वो है कहती क्या समझता  ख़ुद को तू?  मैं नहीं तो क्या है तू  ऐ नकचढ़े? वो ये चाहे अपनी किस्मत ख़ुद लिखे मैंने बोला देखे तुझ जैसे बड़े है क़लम मेरी, मैं जो चाहे लिखूं! मेरी मर्ज़ी, जिस तरफ ये(…)

1

यादों की पहेली को

यादों की पहेली को

यादों की पहेली को कुछ इस तरह सुलझाओ बूझो तो बूझ जाओ वरना भुलाते जाओ तुमने भुला दिया है इतना यकीन है पर मैंने भुला दिया है इसका यकीं दिलाओ मुझे छोड़ के गए तुम सब ले गए थे क्यूँ तुम इतना रहम तो कर दो इक घाव छोड़ जाओ कुछ नफरतें पड़ी हैं कहीं(…)

4

Lucknow Literary Festival

Lucknow Literary Festival

Hi you all fans, Great news! You can catch Neelesh Misra live at Lucknow Literary Festival on 23rd March 2013. Don’t miss this opportunity. For more details, please visit their official website by clicking on the banner above. See you all there!

0

At Luck-Univ on 19/03

Neelesh Misra is going to talk to the students of Journalism and Social Work  at the Lucknow Univ tomorrow at 1030 hrs . If you are around, do not miss this opportunity!

1

2011: फिर नया साल और पुराना मैं

2011: फिर नया साल और पुराना मैं

फिर नया साल और पुराना मैं फिर चला लेके ताना बाना मैं … मैंने आखिर भुला दिया है सब तेरे सजने की कवायद की खनक तेरी परियों की सजावट सी चमक तेरी खामोश निगाही का सबब तेरी दस्तक की ज़बां का मतलब मैंने आखिर भुला दिया है सब यूँ भी थोडा ही तुझको जाना मैं(…)

0